मंडी परिसर में गाय की मौत: 150 आवारा पशुओं को जुटाने वाली नगर पंचायत पर उठे गंभीर सवाल, जिम्मेदारी तय करने की मांग

भूमि पूजन की तैयारियों के नाम पर पशुओं को मंडी में कराया गया जमा, कार्यक्रम टला तो व्यवस्था भी पड़ी सवालों के घेरे में; चारा-पानी और निगरानी के इंतजाम पर नागरिकों ने मांगा जवाब
कवर्धा। नगर पंचायत पिपरिया में प्रस्तावित अस्पताल भवन के भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियों के बीच आवारा पशुओं को मंडी परिसर में एकत्र करने का मामला अब नगर पंचायत के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए नगर क्षेत्र में घूम रहे करीब 150 आवारा पशुओं को मंडी परिसर में लाकर रखा गया था।
लेकिन कार्यक्रम स्थगित होने के बाद इन पशुओं की देखभाल और व्यवस्था को लेकर कथित लापरवाही का आरोप सामने आया है। मामला तब गंभीर हो गया, जब मंडी परिसर में रखी गई गायों में से एक गाय मृत अवस्था में मिली।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जिस व्यवस्था के तहत पशुओं को एक जगह जुटाया गया, उस व्यवस्था की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की थी?
पशुओं को जुटाया किसके आदेश पर?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नगर पंचायत द्वारा भूमि पूजन कार्यक्रम के मद्देनजर करीब 150 पशुओं को मंडी परिसर में लाया गया था, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उन्हें वहां रखने का निर्णय किस अधिकारी के निर्देश पर लिया गया था।
क्या पशुओं को मंडी में रखने से पहले उनके लिए चारा, पानी, छाया और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की कोई कार्ययोजना बनाई गई थी?
और यदि बनाई गई थी, तो उसका पालन किस स्तर तक हुआ?
नागरिकों का आरोप है कि पशुओं को एकत्र करने में तेजी दिखाई गई, लेकिन उनके रखरखाव को लेकर उतनी गंभीरता नहीं दिखाई गई।
गाय की मौत ने खोल दी व्यवस्था की पोल?
मंडी परिसर में गाय की मौत सामने आने के बाद अब पशु प्रेमियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
लोगों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में पशुओं को नगर पंचायत की पहल पर एक स्थान पर रखा गया था, तो वहां मौजूद प्रत्येक पशु की सुरक्षा और स्वास्थ्य की निगरानी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी।
ऐसे में एक गाय की मौत के बाद केवल यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि गाय पहले से बीमार थी या किसी अन्य कारण से उसकी मौत हुई।
मौत का वास्तविक कारण क्या था?
इसका जवाब जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही सामने आ सकता है।
कार्यक्रम स्थगित, लेकिन पशुओं की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जिस कार्यक्रम के लिए पशुओं को मंडी परिसर में इकट्ठा किया गया था, वह कार्यक्रम स्थगित हो गया।
लेकिन कार्यक्रम स्थगित होने से पशुओं की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।
यदि पशुओं को नगर क्षेत्र से हटाकर एक स्थान पर लाया गया था, तो जब तक उन्हें वापस नहीं छोड़ा जाता या किसी सुरक्षित गौशाला/उचित स्थान पर नहीं भेजा जाता, तब तक उनकी देखभाल की जिम्मेदारी किसकी थी—यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान पशुओं को हटाने पर ध्यान दिया गया, लेकिन कार्यक्रम टलने के बाद उनकी स्थिति पर अपेक्षित निगरानी नहीं रखी गई।
पोस्टमार्टम से सामने आएगा मौत का सच
स्थानीय नागरिकों और पशु प्रेमियों ने मांग की है कि मृत गाय का निष्पक्ष पोस्टमार्टम कराया जाए।
यदि मौत बीमारी, भूख-प्यास, चोट, अत्यधिक गर्मी, संक्रमण या किसी अन्य कारण से हुई है, तो उसकी वास्तविक स्थिति रिपोर्ट से स्पष्ट हो सकती है।
साथ ही मंडी परिसर में मौजूद अन्य पशुओं की भी तत्काल स्वास्थ्य जांच कराने की मांग की गई है।
जांच हुई तो तय होगी जवाबदेही
अब मामला केवल एक गाय की मौत तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल यह है कि नगर पंचायत ने पशुओं को एकत्र करने से पहले क्या व्यवस्था की थी और उस व्यवस्था की निगरानी किस अधिकारी के जिम्मे थी।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।



